डॉ संजय के. द्विवेदी
डॉ संजय के. द्विवेदी
निदेशक, रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला (डी आर एल)

डॉ संजय के. द्विवेदी, वैज्ञानिक 'जी' के रूप में तिथि 01 अप्रैल 2018 से निदेशक, डीआरएल (डीआरडीओ) तेजपुर (असम) में शामिल हो गए हैं। वे, वर्ष 1996 में दिहार (डीआईएचएआर), लेह (जम्मू-कश्मीर) से डीआरडीओ में शामिल हुए तथा उन्होंने लद्दाख के पादप आनुवांशिक संसाधनों की संरक्षित खेती, विशेषता, प्रसारण और संरक्षण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर योगदान दिया। उन्होंने लद्दाख के उच्च उन्नतांश, ठंड शुष्क क्षेत्र में पाए जाने वाले समुद्री सीबकथोर्न, खुबानी (एप्रीकोट), सेब और शहतूत हेतु फील्ड जीन बैंक की स्थापना की। सीबकथोर्न (जिसे सामान्यत: "लेह बेरी" के रूप में जाना जाता है) के हर्बल पेय के निर्माण, उसकी पेटेंटिंग और व्यावसायीकरण पर उनका योगदान मुख्य रूप से जाना जाता है। इसके बाद, उन्होंने सेप्टम (सीईपीटीएएम) (डीआरडीओ), दिल्ली में सेवा की और यहां पर इन्होंने 7 भर्ती चक्रों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। इन्होंने डीआरडीओ में डीआरटीसी एवं प्रशासन सहयोगी कैडर की केंद्रीकृत भर्ती हेतु देश के 25 शहरों में डीआरडीओ प्रवेश परीक्षाओं के डिजाइन और समन्वयन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

डीआईबीईआर (डीआरडीओ), हल्द्वानी में, वे केन्द्रीय हिमालयी क्षेत्र में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास हेतु कृषि प्रौद्योगिकियों के विकास, प्रदर्शन और हस्तांतरण में लगे थे। इन्होंने कम लागत वाली ग्रीनहाउस प्रौद्योगिकी, फसलों की मृदा रहित (हाइड्रोपोनिक) खेती, रक्षा उद्देश्यों हेतु स्थानीय पादप संसाधनों का उपयोग तथा उत्तराखंड के दूरस्थ और सीमावर्ती इलाकों में बेरोजगार युवाओं, पूर्व सैनिकों और स्थानीय लोगों हेतु कौशल / उद्यमिता विकास को सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया।

डॉ. एस.के. द्विवेदी के पास अपने 06 पेटेंट, 62 अनुसंधान प्रकाशन, 05 मोनोग्राफ और 02 किताबें उनके क्रेडिट में हैं। इनकी 06 पेशेवर सोसाइटियों के साथ जीवन सदस्यता हैं, ये प्रोग्रेसिव होर्टिकल्चर जर्नल के मुख्य संपादक और 03 पेशेवर सोसाइटियों के सदस्य हैं। वे डीआरडीओ - युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, आईसीएआर - फखरुद्दीन अली अहमद पुरस्कार, आईएसएचआरडी - हिमाद्री युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और एसएआई - राष्ट्रीय वरिष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार के प्राप्तकर्ता भी हैं।

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