सुश्री जे मंजुला
सुश्री जे मंजुला
डीएस एवं महानिदेशक - इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली (ईसीएस)

सुश्री जिल्लेलामुड़ी मंजुला को इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग में डिजिटल प्रणालियों में विशेषीकरण के साथ स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त है। आरंभ में उन्होंने थोड़ी अवधि के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया, हैदराबाद में नौकरी की जहाँ वे एक टीम की सदस्य थी जो ब्रिटेन में डिज़ाइन की गई एचएफ ट्रांसरिसीवर इकाइयों की प्रोडक्शन इंजीनियरिंग का काम पूरा करती थी, जिसे अर्धसैनिक बलों, आपदा प्रबंधन इकाइयों, राज्य पुलिस आदि द्वारा व्यापक रूप से तैनात किया जाता था।

1987 में वे डिफेन्स इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लेबोरेटरी, हैदराबाद में रक्षा आरएंडडी संगठन में शामिल हुई और अलग-अलग महत्त्व और विभिन्न क्षमताओं वाली विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक युद्ध परियोजनाओं में 26 वर्ष तक काम किया।

सुश्री जे. मंजुला इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्लू) के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं। ईडब्लू सेना की शक्ति को बहुत हद तक बढ़ाता है और युद्धक्षेत्र में स्वामी को निर्णायक जीत प्रदान करता है। डिफेन्स इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लेबोरेटरी में, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के क्षेत्र में तीनो सेनाओं के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी विकास और प्रणाली विकास के काम को आगे बढ़ाने का जिम्मा लिया। उनके द्वारा पूरी की गई परियोजनाओं का परीक्षण कर सफल मूल्यांकन किया गया है और सेना और अर्धसैनिक बलों में बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है। उन्होंने मैदानों, अर्ध-रेगिस्तानों, पहाड़ों, जंगलों, हवाई और पोत आधारित अनुप्रयोगों में कार्य करने हेतु प्रणालियों को स्थापित किया है और सभी फील्ड परीक्षणों में टीम लीडर के रूप में भाग लिया है। एयरोस्टाट, यूएवी, हेलिकॉप्टर, विमान, नौसेना पोत और वाहन प्रणालियों के लिए असंख्य ईडब्लू पेलोड उनके मार्गदर्शन में तैयार किए गए हैं। बड़े पैमाने पर प्रणालियों के विकास के अलावा, उन्हें प्रौद्योगिकी विकास की दिशा में निर्देशित अनुसंधान से बहुत लगाव है और हाई पॉवर आरएफ, फास्ट सिग्नल एक्विजिशन, फॉलोअर जैमिंग, फ्रीक्वेंसी सिंथेसिस आदि के क्षेत्रों में उन्होंने सफलता हासिल की है।

जुलाई 2014 में, उन्हें डिफेन्स रिसर्च एवियोनिक्स रिसर्च लेबोरेटरी, बेंगलुरु के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। बेंगलुरु स्थित डिफेन्स रिसर्च एवियोनिक्स रिसर्च प्रतिष्ठान में, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक टीम के साथ उन्होंने भारतीय वायु सेना के लिए विभिन्न हवाई आत्मरक्षा के जैमरों, मिसाइल अप्रोच वार्नर और फाइटर एवियोनिक्स के विकास और उन्नयन के चुनौतीपूर्ण कार्यों पर काम किया। सितंबर 2015 में, उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स व संचार क्लस्टर के महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है जहाँ की प्रयोगशालाएं तीनों सेनाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, राडार, इलेक्ट्रो ऑप्टिक्स उपकरण और प्रणालियों का विकास करती हैं।

2006 में उन्हें डीआरडीओ उत्कृष्ट प्रदर्शन पुरस्कार, 2011 में वर्ष का वैज्ञानिक पुरस्कार, 2014 में इंडिया टुडे की ओर से वुमेन इन साइंस पुरस्कार, 2015 में ईडब्लू में एओसी का सर्वश्रेष्ठ योगदानकर्ता पुरस्कार, और स्वदेशी विज्ञान आंदोलन - कर्नाटक की ओर से 2015 में मैरी क्युरी महिला विज्ञान पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनके और उनकी टीम के नाम कई पेटेंट आवेदन हैं

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