Dr G. Satheesh Reddy

डॉ जी. सतीश रेड्डी

सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग, एवं चेयरमैन डीआरडीओ

कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. जी. सतीश रेड्डी को जो कि रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार रहें है, उन्हें रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (डीडीआरएंडडी) के सचिव एवं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए मंजूरी दे दी है।

डॉ सतीश रेड्डी को, भारत में उनके स्वदेशी डिजाइन, विकास, विविध मिसाइलों और सामरिक प्रणालियों की तैनाती, नियंत्रित आयुध, वैमानिकी प्रौद्योगिकियों की दिशा में किए गए महत्वपूर्ण योगदानों तथा एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों एवं उद्योगों के उन्नयन में निरंतर प्रयासों के लिए जाना जाता है।

उन्होंने जेएनटीयू, अनंतपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की तथा जेएनटीयू, हैदराबाद से एम.एस. एवं पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 1986 में, वे रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), हैदराबाद से जुड़ गए तथा डॉ. कलाम के मस्तिष्क की खोज कहें जाने वाले अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) के बनने के बाद उसमें शामिल हो गए। एक युवा नेविगेशन वैज्ञानिक और सिस्टम मैनेजर के रूप में वे तेजी से आगे बढ़े और अपनी कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास में दशकों तक किए गए अपने निरंतर योगदानों के बाद, सितंबर 2014 में, वे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक के रूप में उभरे तथा मई 2015 में, उन्हें रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया।

रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में, उन्होंने कई राष्ट्रीय नीतियों के सूत्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा प्रक्षेपास्त्रों में आत्मनिर्भरता हेतु रोडमैप विकसित करने में प्रमुख भूमिका निभाई। महानिदेशक, मिसाइल एंड स्ट्रटीजिक सिस्टम्स (डीजी, एमएसएस) के रूप में, उन्होंने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स लेबोरेटरीज - एएसएल, डीआरडीएल और आरसीआई, आईटीआर, टीबीआरएल एवं अन्य तकनीकी सुविधाओं की अगुवाई की। उन्होंने प्रक्षेपास्त्रों में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए कुशल और सामरिक प्रक्षेपास्त्र प्रणालियों की एक विस्तृत श्रृंखला के डिजाइन और विकास का नेतृत्व किया तथा सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक हथियारों और प्रौद्योगिकियों के साथ लैस करने के लिए कई नई परियोजनाओं की पहलें की। उन्होंने बीएमडी कार्यक्रम को बढ़ावा दिया तथा लंबी दूरी पर मार करने वाली अग्नि-5 मिसाइल के लिए मिशन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का विकास किया।

आरसीआई के निदेशक के रूप में, उन्होंने कई कार्यक्रमों, परियोजनाओं का नेतृत्व किया तथा स्वदेशी आरएफ और आईआईआर अन्वेषक के विकास को आगे बढ़ाया। कार्यक्रम निदेशक के रूप में, इन्होंने मध्यम दूरी की एसएएम को सफलतापूर्वक विकसित किया और अपने पहले ही मिशन में सफलताओं के सिलसिले को हासिल कर लिया। परियोजना निदेशक के रूप में, देश की पहली 1000 किग्रा वर्ग वाले गाइडिड बॉम को विकसित किया और लंबी दूरी के स्मार्ट गाइडिड बॉम के लिए नींव रखीं। वे एक प्रसिद्ध नेविगेशन विशेषज्ञ हैं तथा उन्होंने परियोजना निदेशक और प्रौद्योगिकी निदेशक के रूप में, शिप नेविगेशन समेत विभिन्न रक्षा अनुप्रयोगों हेतु स्वदेशी जड़त्वीय सेंसर, सतनव रिसीवर, उन्नत जड़त्वीय नेविगेशन सिस्टम के डिजाइन और विकास को आगे बढ़ाया।

उन्हें रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ नेविगेशन (एफआरआईएन), लंदन, रॉयल एयरोनॉटिकल सोसाइटी, यूके (एफआरएईएस) के फेलो के रूप में तथा रूस की एकेडमी ऑफ नेविगेशन एंड मोशन कंट्रोल के विदेश सदस्य के रूप में शामिल होने का गौरव प्राप्त हैं। वे सीएसआई एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सम्मानीय फेलो, इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, आईईटी (यूके) के फेलो, अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स, यूएसए तथा देश और विदेश में कई अन्य अकादमियों / वैज्ञानिक निकायों के एसोसिएट फेलो हैं।

अपने उत्कृष्ट योगदान हेतु, डॉ सतीश को कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए, जिनमें इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन होमी जे. भाभा मेमोरियल गोल्ड मेडल, नेशनल एयरोनॉटिकल अवार्ड, नेशनल डिज़ाइन अवॉर्ड, नेशनल सिस्टम्स गोल्ड मेडल, इंजीनियरिंग में उत्कृष्टता हेतु प्रथम आईईआई-आईईईई (यूएसए) ज्वाइंट अवार्ड शामिल है तथा इन्हें रॉयल एयरोनॉटिकल सोसायटी, लंदन के रजत पदक से भी सम्मानित किया गया था। वे डॉ बिरेन रॉय स्पेस साइंस डिज़ाइन अवॉर्ड, एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया रॉकेट्री एंड रिलेटिड टेक्नोलॉजी अवॉर्ड के प्राप्तकर्ता भी हैं और उन्हें देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद डिग्री से सम्मानित किया गया है।

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