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भविष्य निरूपण

रक्षा की मजबूती के लिए ईएम शक्ति के स्रोतों के विकास में आत्मनिर्भरता सुसाध्य बनाना।

मिशन

अनुसंधान संस्थानों, शिक्षा और उद्योग जगत के साथ सहयोग में अत्याधुनिक सूक्ष्मतरंग नलियों, सूक्ष्मतरंग शक्ति प्रतिरूपकों, उच्च शक्ति सूक्ष्मतरंग स्रोतों, इलेक्ट्रॉन उत्सर्जकों तथा इलेक्ट्रॉनिक शक्ति अनुकूलकों का स्वदेश में विकास और उत्पादन सुकर बनाने हेतु प्रयास करना।

सूक्ष्मतरंग नली अनुसंधान एवं विकास केन्द्र (एम.टी.आर.डी.सी.) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.), रक्षा मंत्रालय की आईएसओ 9001: 2008 प्रमाणित प्रयोगशाला है। इस प्रयोगशाला की स्थापना सन 1984 में देश की वर्तमान और भावी जरूरतों की पूर्ति के उन्नत प्रकार की सूक्ष्मतरंग नलियों के विकास तथा इस रणनीतिक महत्व के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पाने के लिए की गई थी। एम.टी.आर.डी.सी. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के जलाहल्ली, बेंगलुरू कॉम्प्लेक्स में अवस्थित है। एम.टी.आर.डी.सी. में लगभग 145 उच्च योग्यताप्राप्त वैज्ञानिक, तकनीशियन और सहायता कार्मिकों की टीम है। इस प्रयोगशाला के कार्य का फोकस विभिन्न सूक्ष्मतरंग नलियों, इलेक्ट्रॉनिक शक्ति अनुकूलक, संचार हेतु सूक्ष्मतरंग शक्ति अनुकूलक और प्रेषित्र, रेडार तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्धसामग्री (ईडब्ल्यू) प्रणालियों के अभिकल्प एवं विकास तथा अन्य अनुप्रयोगों पर केन्द्रित है।

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