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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सूक्ष्मतरंग नली अनुसंधान एवं विकास केन्द्र (एम.टी.आर.डी.सी.) की स्थापना रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.), रक्षा मंत्रालय के अधीन वर्ष 1984 में की गई थी। इस प्रयोगशाला को “देश में उन्नत सूक्ष्मतरंग नलियों की जरूरत तथा उनके अनुप्रयोग और अभियांत्रिकी संबंधित पहलुओं के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास संचालित करना” का कार्यदायित्व सौंपा गया था।

सूक्ष्मतरंग नलियों संबंधी कार्य बहुशाखीय है जिसके दायरे में सूक्ष्मतरंग नली अभियांत्रिकी, उच्च निर्वात अभियांत्रिकी, पक्का टांका (ब्रेजिंग) प्रौद्योगिकी, उच्च वोल्टता अभियांत्रिकी तथा पदार्थ विज्ञान इत्यादि शामिल हैं। इस केन्द्र द्वारा सूक्ष्मतरंग नलियों के अभिकल्प और विकास हेतु उत्कृष्ट समर्पित सुविधाएं स्थापित की गई हैं। उत्पादन अभिकरण मैसर्स भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, बेंगलुरू के साथ अन्योन्यक्रिया और अन्य संगठनों जैसेकि डीएलआरएल, डीएमआरएल, (हैदराबाद), आईआईएससी (बेंगलुरू), बीएचयू (वाराणसी), सीईईआरआई (पिलानी), बीएआरसी (मुंबई) तथा अन्यों के साथ सम्पर्क स्थापित किया गया है।

यह केन्द्र सूक्ष्मतरंग नलियों, टीडब्ल्यूटी‘ज तथा कैथोड्स के अभिकल्प और विकास के क्षेत्र में एक मजबूत आधार तैयार करने के बाद, जिनमें से कुछ का उत्पादन भी प्रारंभ हो चुका है, अब सूक्ष्मतरंग शक्ति प्रतिरूपकों और प्रेषित्रों के क्षेत्र में उतरा है। यह केन्द्र रेडार, ईडब्ल्यू तथा संचार के क्षेत्र में डीआरडीओ की प्रणाली प्रयोगशालाओं जैसेकि एलआरडीई, डीएलआरएल, डीएआरई, डीईएएल, आरसीआई तथा टीबीआरएल के निकट सहयोग में कार्यरत है। यह केन्द्र इस सामरिक महत्व के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हेतु कार्यरत है, जबकि कुछ उत्पाद उत्पादन अभिकरण के माध्यम से तैयार होने वाले हैं। अन्य प्रयोगशालाओं जैसेकि डीएमआरएल, एसएसपीएल तथा डीएमएसआरडीई के साथ भी महत्वपूर्ण प्रौ़द्योगिकियों के विकास हेतु सम्पर्क स्थापित किया गया है।

गुणवत्ता नीति:

सीएडी टूल्स, प्रौद्योगिकी तथा गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में निरंतर सुधार द्वारा उपयोक्ताओं की जरूरतों की पूर्ति करने वाले उन्नत सूक्ष्मतरंग शक्ति उपकरणों/मॉड्यूल्स का अभिकल्प और विकास।

 
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