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निदेशक की प्रोफाइल

श्री हरि बाबू श्रीवास्तव ने 20 जून 2014 को लैसटैक के निदेशक का पदभार संभाला।

अगस्त 1984 में डीआरडीओ के देहरादून में स्थित आईआरडीई संगठन में वैज्ञानिक 'बी' के रूप में उन्होंने अपना कैरियर प्रारम्भ किया। 1 अप्रैल 2000 को उन्हें आईआरडीई के सर्वो प्रणाली प्रभाग का प्रमुख नियुक्त किया गया और 01 जनवरी 2008 को अग्नि नियंत्रण प्रणाली डिजाइन केन्द्र में मुख्य डिजाइनर के रूप में प्रोन्नत किया गया तथा 1 जुलाई 2012 को उन्हें अग्नि नियंत्रण प्रणाली समूह के समूह निदेशक का पद प्रदान किया गया। 18 अप्रैल 2013 को उन्होंने डीआरडीओ मुख्यालय में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्प्यूटर साइंस के निदेशक का पदभार संभाला जिसे रामा राव कमेटी की सिफारिशों के कार्यान्वयन के अनुसार डीआरडीओ मुख्यालय की पुनःसंरचना के समय निदेशक तकनीक (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली) के पद में परिवर्तित कर दिया गया।

आईआईटी, रूड़की और आईआईटी, कानपुर के भूतपूर्व छात्र, श्री हरि बाबू श्रीवास्तव ने आईआरडीई में नियंत्रक इंजीनियर के रूप में विशेज्ञता प्राप्त की।  बाद में अपनी विभिन्न क्षमताओं से उन्होंने - ईओ संवेदक एकीकरण, दृश्य स्थायीकरण की पंक्ति, अन्तःस्थापित इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सॉफ्टवेयर, प्रक्षेपण संबंधी गणना, हथियार नियंत्रण, अग्नि नियंत्रण आदि कई विद्युत प्रकाशीय अग्नि नियंत्रण और निगरानी प्रणालियों की प्रौद्योगिकी के विकास का नेतृत्व किया। इन प्रौद्योगिकियों का अर्जुन एमके-I और एमके-II मुख्य युद्ध टैंकों, नौसेना के पोतों की इलेक्ट्रो-प्रकाशीय अग्नि नियंत्रण प्रणालियों, पैदल सैनिको के लड़ाकू वाहन 'अभय' और हवा में गिराए जाने वाले बमों के लिए जिंबल लेजर ग्रहण कारिता के विभिन्न इलेक्ट्रो-प्रकाशीय अग्नि नियंत्रण और निगरानी दृश्य/प्रणालियों में उपयोग किया गया। अपने प्रत्यक्ष उत्तरदायित्व की प्रणालियों के अतिरिक्त उन्होंने डीआरडीओ की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में विभिन्न डिजाइन और अन्य पुर्नविचार समितियों के विशेषज्ञ सदस्य के रूप में योगदान दिया। डीआरडीओ मुख्यालय में विचार मंच के हिस्से के रूप में उन्होंने ईसीएस समूह के क्षेत्रों से संबंधित बहुत सी रिपोर्टें बनायी तथा एलटीआईपीपी की तात्कालिक आवश्यकताओं की दिशा में डीआरडीओ के व्यवसायिक दृष्टिकोण को विकसित करने के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिकों के दल का नेतृत्व किया।

डीआरडीओ/आईआरडीई की अनेक आंतरिक रिपोर्टों के अतिरिक्त उन्होंने विभिन्न प्रसिद्ध राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं और संगोष्ठियों/सम्मेलनों की कार्यवाही के लिए 25 तकनीकी लेख लिखे। उन्होंने 'रात्रि दृष्टि और विद्युत प्रकाशिकी प्रौद्योगिकी की समीक्षा' पर डीआरडीओ के विशेष लेख का सह-सम्पादन किया है।<

वे आप्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ओएसआई) और इंस्ट्रूमेंट सासाइटी ऑफ इंडिया (आईएसओआई) के आजीवन सदस्य हैं। वे आईएसओआई की राष्ट्रीय प्रबंध समिति के भूतपूर्व संयुक्त सचिव भी हैं। वे डीआरडीओ नकद पुरस्कार, डीआरडीओ समूह प्रौद्योगिकी पुरस्कार और प्रयोगशाला सामूहिक प्रौद्योगिकी पुरस्कार के प्राप्तकर्ता भी रहे हैं।

 
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