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कार्यक्षेत्र

  • डीटीआरएल के कार्य का प्रमुख दायरा रक्षा बलों द्वारा विभिन्न प्रकार के भूभागों जैसेकि पर्वतीय, मरूस्थलीय, रण, मैदानी तथा तटवर्ती क्षेत्रों में सामना की जा रही सभी भूभागीय समस्याओं के संबंध में अनुसंधान एवं विकास कार्य तक फैला है।
    रण क्षेत्र मरूस्थलीय भूभाग
    पहाड़ी भू-भाग मैदानी क्षेत्र

  • प्रयोगशाला को तल और अधस्तल अभिलक्षणन के लिए उपयोग किए जाने वाले अपने भूभौगोलिक, भूवैज्ञानिक, भू पर्यावरण प्राचलकों, भू उपयोग तथा भू व्याप्ति के आधार पर क्षेत्र मानचित्रण और विश्लेषण में महारत हासिल है।
  • सुदूर संवेदन एवं जीआईएस के उपयोग द्वारा भूभाग मूल्यांकन:
    • अपमार्ग परिदृश्य में यातायात संभाव्यता अध्ययन और सचलता मानचित्र तैयार करना
    • विद्यमान मानचित्रों का स्वतः अद्यतन
    • भूभाग संभाव्यता हेतु भूभागीय संक्षिप्त विवरण
    • अद्यतित भूभौगोलिक मानचित्र जनन
  • उपग्रह और वायुवाहित सुदूर संवेदी मंच से भूभागीय विशेषताओं का निष्कर्षण, उनका चाक्षुषीकरण एवं भूभागीय संभाव्यता हेतु मानचित्रण और सार्ववर्णिक, बहु-स्पेक्ट्रमी और अधिस्पेक्ट्रमी बैंड्स में सूक्ष्मतरंग, तापीय तथा दृश्य प्रतिबिम्बों के उपयोग द्वारा युद्ध क्षेत्र प्रणाली को जानकारी।
  • भूभागीयप्राचलकों के मूल्यांकन हेतु पारम्परिक तथा गैर-पारम्परिक तकनीकें।
  • भूभागीय उपयोग के लिए अनुकरण और प्रतिदर्शन पर आधारित स्थिति संबंधी जानकारी और निर्णय सहायता प्रणाली। परिवर्तन संसूचन तथा लक्ष्य की पहचान और मिशन योजना अनुप्रयोगों के लिए भिन्न सूदूर संवेदी मंचों पर मौजूद विभिन्न संवेदियों तथा पेलोड्स से भारी मात्रा में प्राप्त दत्त सामग्री का दत्त सामग्री खनन, दत्त सामग्री विमा इत्यादि के उपयोग द्वारा मंथन करने के लिए मशीनी बुद्धिमता, पैटर्न पहचान, प्रतिबिम्ब संसाधन प्रौद्योगिकियों की भूमिका।
  • दुर्गम भूभागों जैसेकि खाई-सह-बंध, मरूस्थलों, पर्वतों इत्यादि में पारम्परिक तथा गैर-पारम्परिक विधियों के उपयोग द्वारा क्षेत्र अध्ययन और उपयुक्त अधोसंरचना का विकास।
    रण क्षेत्र मरूस्थलीय भूभाग
    रण क्षेत्र मैदानी क्षेत्र

  • विधिमान्यकरण तथा मूल्यांकन हेतु परीक्षण तल का सृजन
  • भूस्खलन अध्ययनों में अनुसंधान एवं विकास, आकलन, प्रबंधन, संकट उपशमन तथा भूस्खलनों हेतु पूर्व चेतावनी प्रणाली
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