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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

रक्षा एवियानिक्स अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीएआरई ) की शुरुआत मूलत : एक परियोजना प्रयोगशाला -उन्नत एकीकरण प्रणाली और मूल्यांकन संगठन (एएसआईईओ ) के रूप में हुई थी , जिसकी स्थापना , आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारतीय वायु सेना की अभियान संबंधी क्षमता में विकास करने के लक्ष्य प्राप्ति के लिए , बंगलौर में 1986 में हुई। पिछले दशक से , डीएआरई ने एयरबोर्न इलैक्ट्रोनिक युद्ध भेदक , एयरबोर्न प्रोसेसर और प्रशिक्षण एवं इलैक्ट्रोनिक युद्ध भेदक (ईडब्ल्यू ) प्रणाली मूल्यांकन , के क्षेत्र में काफी प्रगति की। इसने उद्योगों के साथ साझेदारी से सहवर्ती इंजीनियरिंग में अवधारणाओं को लागू किया ताकि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समय पर करने के लिए लघु डिजाइन हासिल किए जा डीएआरई के दो मुख्य स्कंध हैं - इलैक्ट्रानिक वारफेयर (ईडब्ल्यू ) स्कंध और मिशन एवियानिक्स (एमएडब्ल्यू ) स्कंध । यह ईडब्ल्यू विंग , रडार संकेतक की अभिकल्पन और विकास पर ध्यान केंद्रित करती है , और ईडब्ल्यू विभिन्न विमानों का जीवन बढ़ाने और मिशन निष्पादन के लिए है।
इन प्रणालियों का निर्माण भारत इलैक्ट्रॉनिक्स के अंतर्गत होता है। एमएडब्ल्यू ने एवियानिक्स मिशन क्षेत्र में देश में ही विकास किया है। लड़ाकू विमान के लिए मिशन कंप्यूटर विकसित किए गए हैं और काफी मात्रा में अंतरित किए गए हैं। आरंभिक एएसआईईओ का नेतृत्व , इसकी शुरूआत से ही , प्रसिद्ध वैज्ञानिक डा . केजी नारायण ने किया। यह 1 जून 2001 से पूर्ण आत्म -निर्भर संगठन बन गया और इसका नाम बदलकर डीएआरई (वैमानिक रक्षा अनुसंधान प्रतिष्ठान ) रखा गया। डीएआरई का औपचारिक नेतृत्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक श्री आर .पी . रामलिंगम द्वारा 18 जनवरी , 2002 को किया गया।
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