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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि


जब से मनुष्य ने पक्षियों की नकल करने का सपना देखा और उड़ान भरने के लिए कदम बढाया, तभी से सुरक्षा और उड़ान योग्यता चिंता के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। परिचालन की मांगों ने चरम पर्यावरण परिस्थितियों के साथ मिलकर विमानन को एक ऐसी गतिविधि बना दिया है, जो विफलताओं के प्रति न्यूनतम सहिष्णु है। प्रदर्शन लक्ष्यों को, विशेषज्ञों के व्यावहारिक ज्ञान द्वारा परिष्कृत डिजाइन टीम की रचनात्मक प्रतिभा के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है, अतः एक सुरक्षित और विश्वसनीय डिजाइन के लिए कुछ सुरक्षा नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है। सुरक्षा और विश्वसनीयता के न्यूनतम स्वीकार्य स्तर के लिए एक स्वतंत्र विनियामक प्रणाली आवश्यक है, जो संभावित विफलताओं का अनुमान लगाती है, डिजाइन और निर्माण में विचलन का आकलन करती है, परिचालन की मांगों का अनुकरण और मूल्यांकन करती है तथा उड़ान योग्यता सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन को प्रमाणित करती है।


पिछले डेढ़ दशकों में भारत में एयरोस्पेस गतिविधियों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। विमानन सामग्री, प्रणालियों और लक्ष्यों की जटिलताओं ने उड़ान योग्यता आश्वासन कार्यों के लिए अत्यधिक चुनौतियां उत्पन्न की हैं। उड़ान योग्यता आश्वासन तेजी से एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में उभर रहा है और हल्के लड़ाकू विमानों, उन्नत हल्के हेलीकाप्टरों, कावेरी इंजन, मानव रहित हवाई वाहनों, उन्नत मिसाइल प्रणालियों, हल्के लड़ाकू हेलीकाप्टरों, एसएआरएएस, एफजीएफए, एरोस्टैट्स आदि अगली पंक्ति की परियोजनाओं के लिए इस पर ध्यान देने की जरूरत है।


1994 में स्थापित, सैन्य उड़ान योग्यता और प्रमाणन केन्द्र (सेमिलैक), भारत में एयरोस्पेस गतिविधियों के गढ़, बंगलौर से कार्य करता है। सैन्य विमानन और हवाई प्रणालियों से संबंधित उड़ान योग्यता  का कार्य जो अब तक एयरोनॉटिक्स निदेशालय द्वारा किया जाता है, अब पूरी तरह से सेमिलैक द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है। (आरसीएमए). एचएएल, अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान और बेस मरम्मत डिपो (बीआरडीएस) के विभिन्न प्रभागों में स्थित तत्कालीन आवासी तकनीकी अधिकारियों का नाम बदलकर अब सैन्य (आरसीएमए) उड़ान योग्यता के क्षेत्रीय केंद्र कर दिया गया है। इन क्षेत्रीय केंद्रों को तेजी से और अधिक प्रभावी उड़ान योग्यता कार्यों के लिए सेमिलैक के अंतर्गत लाया गया है। विमानों, हेलिकॉप्टरों, यूएवी, मिसाइलों की डिजाइन, निर्माण और उनकी प्रणालियों की मरम्मत के दौरान उड़ान योग्यता सुनिश्चित करने के लिए पूरे देश भर में चौदह आरसीएमएएस हैं।


सेमिलैक एक आईएसओ 9001-2008 प्रमाणित संगठन है, जो महानिदेशक, रक्षा अनुसंधान एवं विकास के नेतृत्व में, मुख्य कार्यकारी (उड़ान योग्यता) नियंत्रण में काम करता है। समग्र कामकाज और चौदह क्षेत्रीय केंद्रों (आरसीएमए) की निगरानी में मुख्य कार्यकारी की मदद के लिए चार समूह निदेशक हैं।


हम कौन हैं


जब हम जगुआर, किरण, एवरो, डोर्नियर, मिग, एलसीए जैसे विमानों और एएलएच, चीता, चेतक जैसे हेलीकाप्टरों तथा उन्हें चलाने वाले इंजनों के परिचालन के लिए सेमिलैक और आरसीएमए द्वारा निर्धारित परिचालन जाँच और मूल्यांकन की तरफ देखते हैं तब सेमिलैक द्वारा निर्धारित मार्ग के महत्व को समझा जा सकता है।


यह कौशल और ज्ञान का भंडार सेमिलैक को देश में विकसित उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) को सेवा में उतारने और देश में ही विकसित चौथी पीढ़ी के परिष्कृत, अत्याधुनिक हल्के लड़ाकू विमानों (एलसीए) प्रारंभिक परिचालन मंजूरी (आईओसी) देने की क्षमता प्रदान करता है। पिछले दशकों की विरासत से यह दृढ़ विश्वास उत्पन्न हुआ है कि सेमिलैक जल्द ही अंतिम संचालन मंजूरी (एफओसी) देगा और एलसीए को सेवाओं में शामिल करेगा।


जटिल सैन्य मशीनें जो आसमान में उड़ान भरती हैं और मानवीय जरूरतों और आदेशों का प्रत्युत्तर देती हैं, उनके पीछे सेमिलैक और उसके क्षेत्रीय केंद्रों में काम कर रहे कर्मियों की एक टीम का समर्पित प्रयास विद्यमान है, जो चुपचाप अपने काम में लगे रहते हैं। इन लोगों के इंजीनियरिंग निर्णय के बल पर ही भारत के सशस्त्र बल विश्वास सहित प्रत्युत्तर देते हैं।

यह वर्षों में प्रखर हुआ सेमिलैक का तकनीकी कौशल है जो हवा से भारी मशीनों को अत्यंत सुरक्षित उड़ान भरने में सक्षम बनाता है।


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