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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जुलाई 1985 में, (i) स्वदेशी  प्रारंभिक  हवाई (एईडब्ल्यू) चेतावनी प्रणाली के विकास के लिए आवश्यक और पर्याप्त डेटाबेस उत्पन्न करने के लिए चिह्नित 43 अग्रणी योजनाओं  पर कार्य आरंभ करने, (ii) एक परियोजना परिभाषा रिपोर्ट (पीडीआर) तैयार करने और (iii) सीसीपीए (संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति) द्वारा कार्यक्रम की स्वीकृति के लिए प्रकरण का विवरण तैयार करने के लिए एक अग्रणी परियोजना कार्यालय 'एएसडब्ल्यूएसी' (विमानस्थ चेतावनी निगरानी और नियंत्रण) का गठन किया गया था। एएसडब्ल्यूएसी परियोजना कार्यालय के इन उद्देश्यों के सफलतापूर्वक सम्पन्न हो जाने के बाद, इलेक्ट्रॉनिक बल गुणकों के विकास के लिए देश में उपलब्ध समस्त बुनियादी सुविधाओं और विशेषज्ञता का उपयोगकर एक प्रणाली गृह और एक एकीकरण एजेंसी के रूप में कार्य करने के लिए 1 फरवरी 91 को सीएबीएस (विमानस्थ प्रणाली केंद्र) का गठन किया गया, शुरू में यह एईडब्ल्यू/एएसडब्ल्यूएसी संबंधित प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित थी।

केंद्र ने, एक केंद्रीय एजेंसी के तौर पर, एक 'प्रौद्योगिकी प्रदर्शक' कार्यक्रम के रूप में एक संशोधित एच एस- 748 विमान पर एएसपी विमानस्थ निगरानी मंच के विकास का कार्य प्रारंभ किया हालांकि, एक दुर्घटना की वजह से कार्यक्रम को एक झटका लगा और इसे जल्दी ही बंद कर दिया गया था, केंद्न ने एएसपी के विकास और प्रदर्शन के दौरान कई तकनीकी बढ़तें हासिल की।  भारतीय वायु सेना और डीआरडीओ ने संयुक्त रूप से आगे बढ़ने के लिए एएसपी के विकास के दौरान बनाई गई क्षमता, विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे का लाभप्रद उपयोग करने की आवश्यकता पर सहमति जताई।  इसके बाद सीएबीएस के कर्तव्यों के चार्टर को संशोधित और पुनर्संयोजित किया गया तथा 06 अक्तूबर 4 को एईडब्ल्यू एवं सी (विमानस्थ आरंभिक चेतावनी एवं नियंत्रण) कार्यक्रम के साथ एडब्ल्यूएसीएस के भारतीय वायुसेना के बेड़े के क्षेत्रीय जेट वर्ग के एक पूरक विमान पर विन्यस्त अत्याधुनिक (स्टेट-ऑफ-द-आर्ट) प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने की मंजूरी दी गई।  

 
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