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कार्य क्षेत्र

विगत वर्षों में, एडीई भारतीय सशस्त्र सेनाओं की निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इससे संबंधित प्रोद्यौगिकियों का विकास किया है। प्राथमिक तौर पर प्रमुख कार्य क्षेत्रों में निम्नलिखित शामिल हैं :-

  • मानवरहित हवाई वाहन
    • न्यून गति वाले लंबी क्षमता के मानवरहित वायुयान पद्धतियां
    • उच्च गति वाले यूएवी जिसमें टारगेट वायुयान परिभ्रमण वाहन शामिल हैं।
  • लड़ाकू वायुयान पद्धतियां
  • माइक्रो हवाई वाहन
  • उड़ान अनुरूपक `
  • वायु शस्त्र एकीकरण
  • हवाई चित्र उपयोग

मानव रहित हवाई वाहन:



मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी'ज) युद्ध पद्धति में, महत्वपूर्ण घातक एवम्, गैर-घाती प्रवर्धक बल हैं। ये विशिष्ट सिविलियन भूमिकाओं में मानवयुक्त वायुयानों की अपेक्षा किफायती विकल्प हैं और वैमानिकीय अनुसंधान के लिए कीमती परीक्षण आधार का काम करते हैं। यूएवी की महत्वपूर्ण सैन्य एवं नागरिक उपयोगिताएं हैं जिसमें हवाई सर्वेक्षण एवं निगरानी, शस्त्र डेलीवरी मंच, क्रूज मिसाइल्स, सीमा अनुवीक्षण, कानून प्रवर्तन, गैर-तस्कर और गैर-उग्रवादी संक्रियाएं, मौसम अनुसंधान, संप्रेषण, आपदा प्रबंधन, प्रदूषण अनवक्षिण आदि शामिल हैं। एडीई के निम्नलिखित भूमिकाओं के लिए यूएवी का विकास किया है:
  • टारगेट जो हवाई खतरों का अनुरूपण करते हैं।
  • निगरानी एवं सर्वेक्षण मंच
एडीई विभिन्न इंजीनियरी इकाइयों से संबंधित यूएवी प्रोद्यौगिकियों के विकास में अग्रणी रही हैं। महत्वपूर्ण प्रोद्यौगिकी और इकाइयों में निम्नलिखित प्रोद्यौगिकी प्रभाग शामिल हैं:-

  • वायुगति का प्रभाग – वायुगति की प्रभाग एक सबसे महत्वपूर्ण प्रद्यौगिकी प्रभाग है जो वायुगति की विन्यास डिजाइन, निष्पादन मूल्यांकन एवम् विश्लेषण, वायुगति की डिजाइन से संबंधित है और जिसमें सीएफडी एवम् इंजीनियरी प्रणालियों, पवन टनल मॉडल डिजाइन एवं परीक्षण, प्राप्लर डिजाइन एवम् विकास और स्टोर प्रथकीकरण अनुरूपक एवम् परीक्षण का प्रयोग होता हैं।
  • वायुयान संरचना डिजाइन केन्द्र – इसमें एयर फ्रेम डिजाइन एवम् विश्लेषण, सीजी प्रबंधन एवम् लेआउट डिजाइन, ऐसे इलास्टिक विश्लेषण, संरचनात्मक परीक्षण, प्रेरकों का यांत्रिकी डिजाइन, इलैक्ट्रॉनिक संलग्नक डिजाइन और आयभार हाउसिंग डिजाइन शामिल हैं।
  • प्रणोदन पद्धति प्रभाग – यह प्रणोदन एकीकरण पद्धति, ईंधन प्रबंधन पद्धति, वायु-ग्रहण डिजाइन एवम् विश्लेषण और बूस्टर एकीरण से संबंधित हैं।
  • उड़ान नियंत्रण कम्पयूटर प्रभाग - यह प्रभाग आनबोर्ड अंकीय एवम् अनुरूप उड़ान नियंत्रण कम्पयूटरों और यूएवी एवम् मानवयुक्त वायुयानों के लिए अंतर्रापृष्ठ पद्धतियों से संबंधित विकास के लिए उत्तरदायी होता है।
  • उड़ान अनुरूपक प्रभाग – इस प्रभाग ने पिछले तीन दशकों से देश में उड़ान अनुरूपक प्रोद्यौगिकी एवम् उड़ान अनुरूपक के विकास मार्ग प्रशस्त किया है। इस विभाग की पायलट-इन-लूप अनुरूपण सुविधाओं के स्थापन एवम् संचालन में, निश्चयन में नए वायुयान परियोजनाओं के लिए इंजीनियरी अनुरूपक समर्धन प्रदान करने में विकास और उड़ान परीक्षण चरणों में, आधुनिक वायुयान से संबंधित संचालन गुणवत्ताओं एवम् अन्य समस्याओं का अन्वेषण करने से और डिजाइन विकास और समस्याओं का अन्वेषण करने में और डिजाइन, विकास और प्रशिक्षण में अनुरूपक तकनीकों के प्रयोग में सक्षमताओं के निरंतर वृद्धि से संबंधित अनुप्रयुक्त अनुसंधान करने में प्रमुख जिम्मेदारियां होती हैं।
  • उड़ान नियंत्रण जांच पद्धति – यह पद्धति आधुनिकतम प्रद्यौगिकी का प्रयोग करते हुए मानवयुक्त वायुयानों के उड़ान नियंत्रण पद्धतियों (एफसीएस) के वैधीकरण एवम् प्रमाणन के लिए जिम्मेदार रहती हैं। एलसीए की उड़ान नियंत्रण पद्धति का परीक्षण करने के उद्देश्य से पहला इंजीनियरी जांच स्टेशन एडीई में 1994 में स्थापित किया गया। एलीसीए के लिए एफसीएस के तीव्र विकास के समर्थन में, एडीई ने पांच ईटीएस एडीई, एडीए, एआरडीसी, एचएएल और बीईएल में (डीएफसीसी के लिए) स्थापित किए हैं।
  • उड़ान जांच टेली कमांड और खोजी प्रभाग – यह वायु वाहित और भू एंटिना, वायुयान आरोपित ऐंटिना पैटर्न अध्ययनों और भू नियंत्रण स्टेशन और रडार आवर्धक विकास आदि के डिजाइन में शामिल रहता है।
  • उड़ान यांत्रिकी और नियंत्रण इंजीनियरी – यह प्रभाग विभिन्न यूएवी और शस्त्र कार्यक्रमों के लिए आधुनिकतम नौ संचालन, निर्देशन उड़ान और लक्ष्य नियंत्रण पद्धतियां प्रदान करता हैं। एक प्रमुख इंजीनियरी प्रभाग के रूप में, इस प्रभाग में दो प्रमुख अंग होते हैं, जिनका नाम है उड़ान यांत्रिकी एवम् लॉ डिजाइन ग्रुप (एफएमसीएलडी) और आवर्धक ग्रुप।
  • सॉफ्टवेयर इंजीनियरी प्रभाग-एलसीए – यह प्रभाग सॉफ्टवेयर इंजीनियरी अभ्यासों का प्रयोग करते हुए वायु वाहित प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा सॉफ्टवेयर की वर्तमान एवम् भावी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेषज्ञता प्रदान करता है और महत्वपूर्ण सुरक्षा सॉफ्टवेयर के लिए पश्च उड़ान विश्लेषण निष्पादित करता है। यह प्रभाग समय-समय पर सुपुर्द किए गए विशिष्ट वायु वाहित पद्धति परियोजनाओं के लिए अंतःस्थापित सॉफ्टवेयर विकसित करता है।
  • सॉफ्टवेयर इंजीनियरी प्रभाव - यूएवी – यह प्रभाग एक केंद्रीकृत परिवेश और विशेषज्ञों का पूल तैयार करने और उसको संवर्धित करने के लिए उत्तरदायी है ताकि आवश्यक एयरबोर्न पद्धति मिशन के लिए सन्निहित सॉफ्टवेयर की वर्तमान और भावी जरूरतें पूरी हो सकें। यह प्रभाग सभी यूएवी परियोजनाओं के लिए एफसीएस (फ्लाइट नियंत्रण सिस्टम) सॉफ्टवेयर को डिजाइन करने एवं विकसित करने में संलग्न है, और पद्धति संयोजन, परीक्षण और फ्लाइट अभ्यास में सहायता भी करता है।
  • मिशन सेंसर्स प्रद्योगिकी प्रभाग – यह प्रभाग सेनाओं और स्थिर गिम्बाल आयभार असेम्बली के सर्वेक्षण एवम् निगरानी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इलैक्ट्रो-आप्टिक पद्धतियों के डिजाइन एंव विकास में अंतनिर्हित रहता हैं।
  • एविओनिक्स पद्धति प्रभाग – यह प्रभाग लड़ाकू वायुयान और हवाई वाहनों के लिए कॉकपिट डिस्पले पद्धतियों के डिजाइन एवम् विकास के लिए उत्तरदायी होता है। यह प्रभाग यूएवी के लिए मिशन कंप्यूटर का डिजाइन एवम् विकास करने और एहिल्स परियोजन के ओपल आरटी पद्धति का प्रयोग करते हुए उसके लिए एविओनिक्स रिग स्थापित करने में सम्मलित रहता है।
  • यूएवी'ज के लिए असेम्बली और एकीकरण केन्द्रः – यह प्रभाग एविऑनिक्स एकीकरण के कार्य को करने का विशेष प्रभाग है। यह प्रभाग पद्धति एकीकरण, उड़ान विकास परीक्षणों, प्रयोक्ता प्रशिक्षण और फील्ड सहायता, यूएवी का सीमित श्रृंखला उत्पादन और उत्पादन ऐजेंसी के लिए प्रद्यौगिकी हस्तांतरण में सक्रिय योगदान देता है।
  • हवाई चित्र उपयोग प्रयोगशालाः – यूएवी मिशन के दौरान चित्रों से प्राप्त सूचना को अर्जित, भंगरण, पुनःप्राप्त, प्रोसेस, विश्लेषण व्याख्या, प्रदर्शित और वितरित करने के लिए आधुनिकतम हार्डवेयर एवम् चित्र उपयोग सॉफ्टवेयर के साथ भू चित्र उपयोग पद्धति का विकास किया गया हैं। सैन्य एवम् आसूचना विश्लेषक चित्र विश्लेषण के शक्तिशाली औजारों का प्रयोग करते हुए सजीव वीडियो चित्र देख सकते हैं।


  • मिश्रित प्रद्यौगिकी केन्द्र – यह प्रभाग एक पालीमर मिश्रित संरचना, विकास और लश्रण-वर्णन केन्द्र है और मिश्रित संसाधन सुविधाओं से सुसज्जित है जिसमें सुमेलित डाइ मोल्डन निर्वात रखाव और रेजिन इंफ्यूजन मोल्डन (आरआइएम) एवम् रेजिन हस्तांतरण मोल्डन (आरटीएम) जैसे उच्च तरल मोल्डन तकनीक शामिल हैं। प्रभाग के पदार्थ लक्षण-चित्रण सुविधाओं से डाइनेमिक मैकेनिकल एनालाइजर, मॉड्यूलित डिफ्रेंशियल स्कैनिंग कैलोरीमीटर (एमडीएससी), अवरक्त फोरियर ट्रांसफॉर्म (एफटीआइआर) स्पेक्ट्रोमापी, वायु-युग्मित पराध्वनिक स्कैनर, यांत्रिक परीक्षण मशीन और उच्च आवर्धन प्रकाशीय सुक्ष्मदर्शी सम्मलित होते हैं।
  • गुणवत्ता एवम् वायुयोग्यता – गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी गुणवत्ता आशवासन और एडीई परियोजनाओं के विश्वसनीय विश्लेषण और सामान्य विकास से सुपुर्द एडीई का प्रमुख तकनीकी सहायता प्रभाग भीतर और विक्रेता परिसर दोनों में काम करता हैं। प्रभाग यूएवी के लिए वायु योग्यता प्रमाणन गतिविधियों में भी शामिल रहता हैं।
  • लड़ाकू वायुयान प्रणालियां-तेजस - तेजस की चार जटिल आधुनिकतम प्रद्यौगिकीयों में से एक फ्लाई-बाई-वायर उड़ान नियंत्रण पद्धति (DFBW-FCS) है। राष्ट्र का पहला DFBW-FCS एडीई द्वारा कार्यान्वित किया गया और 4 जनवरी 2001 को पहली उड़ान के दौरान तेजस प्रद्यौगिकी प्रदर्शन वायुयान में लगाया गया। एडीई द्वारा कॉकपिट डिस्प्ले स्यूट और इंजीनियरी जांच स्टेशन के डिजाइन एवम् विकास भी दिए गए।




  • उड़ान अनुरूपण - एडीई लड़ाकू पायलटों के संक्रियात्मक प्रशिक्षण के लिए उड़ान अनुरूपकों के विकास के क्षेत्र में भी अग्रणी रहा और इसने निम्नलिखित का डिजाइन एवम् निर्माण कियाः-
    • अजीत एवम् किरन वायुयान के लिए अंकीय उड़ान अनुरूपक
    • तेजस एलसीए इंजीनयरी अनुरूपक








    • उन्नत मिग-27 के लिए एविओनिक्स पार्ट टास्क ट्रेनर












    • कम्प्यूटीकृत पायलट चयन पद्धति (सीपीएसएस)
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