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DRDO
ईआर और आईपीआर

दृष्टि

राष्ट्र की सुरक्षा और संरक्षा की भावी आवश्यकताओं की सहायता हेतु विज्ञान और प्रौद्योंगिकी के क्षेत्रों में विश्वस्तरीय शैक्षिक अनुसंधान आधार वाला संस्थान बनना।

मिशन

भारतीय शैक्षिक अनुसंधान केन्द्रों में अनुसंधान संकाय के साथ नेटवर्क स्थापित करना, शैक्षिक संस्थानों के अन्दर उत्कृष्टता के केन्द्र सृजित करना, अनुसंधान अवसंरचनाओं का संवर्धन तथा सु-परिभाषित परियोजनाओं के माध्यम से अग्रगत अनुसंधान की सहायता करना तथा डीआरडीओ की तात्कालिक तथा भावी आवश्यकताओं के लिए आवश्यक ज्ञान और सक्षमताओं का विकास करना। परिणाम का उपयोग डीआरडीओ प्रयोगशाला द्वारा रक्षा सेवाओं के लिए उत्पाद और प्रौद्योगिकी के विकास हेतु किया जाएगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अनुदान सहायता योजना के माध्यम से देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों तथा अनुसंधान एवं विकास केन्द्रों में एस एवं टी उत्कृष्टता की क्षमता का लाभ तीनों सेनाओं के रक्षा विज्ञान संगठन और तकनीकी विकास प्रतिष्ठानों के माध्यम से, उनका विलय कर 1 जनवरी 1958 को डीआरडीओ का गठन किए जाने से पूर्व भी, प्राप्त किया जा रहा था। डीआरडीओ का सृजन किए जाने पर, बाह्य अनुसंधान कार्यकलापों का निष्पादन पूर्वतः प्रशिक्षण और प्रायोजित अनुसंधान निदेशालय (डीटीएसआर) के तत्वावधान में किया गया।
सशस्त्र बलों के लिए आधुनिकतम रक्षा प्रणाली के विकास की आवश्यकता के साथ, वैमानिकी, आयुधादि, इलेक्ट्रॉनिकी, युद्धक वाहन, प्रक्षेपास्त्र, यंत्रीकरण, अग्रगत परिकलन एवं अनुकरण, अग्रगत सामग्री, नौसेना प्रणालियों, रक्षा विज्ञानों, एनबीसी तथा सूचना प्रणालियों समेत विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आधुनिकतम प्रौद्योगिकियों के विकास से डीआरडीओ की ईआर गतिविधियों में वृद्धि के फलस्वरूप एक पृथक निदेशालय के सृजन की आवश्यकता पैदा हुई।
1958 में डीआरडीओ के गठन के समय से ही भारत तथा अन्य देशों में आईपीआर आवेदन प्रस्तुत करता रहा है, जिनमें पेटेण्ट, डिजाइन एवं कापीराइट आवेदन सम्मिलित हैं।
तथापि, 90 के दशक के आरंभ में, गैट (जीएटीटी) के तहत समझौता वार्ता पर चर्चा को मीडिया में प्रमुखता मिलना आरंभ होने के साथ ही लोगों को बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की अहमियत का अहसास होने लगा। अन्ततः भारत ने ट्रिप्स (व्यापार संबंधी पहलू और बौद्धिक सम्पदा अधिकार) समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए तथा विश्व व्यापार संगठन का सदस्य बन गया और इस प्रकार तकनीकी समन्वय को इस संबंध में अधिक संवेदनशील बना दिया। सितम्बर, 1996 में डीआरडीओ मुख्यालय में तकनीकी समन्वय निदेशालय के भीतर समर्पित जनशक्ति के साथ एक पृथक आईपीआर ग्रुप के गठन द्वारा एक नई शुरूआत की गई। तकनीकी समन्वय निदेशालय ने तकनीकी समन्वय एवं आईपीआर निदेशालय के रूप में कार्य आरंभ कर दिया।
डीआरडीओ में ईआर एवं आईपीआर के इतिहास में 01 मई, 2000 को आधिकारिक रूप से एक पृथक ईआर एवं आईपीआर निदेशालय के सृजन के साथ एक उपलब्धि हासिल की गई।

 
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