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अवधारणा



'मानव और हथियार' रक्षा प्रणाली के दो सहजीवी घटक हैं। हथियार प्रणालियों का विकास महत्वपूर्ण है, साथ ही 'हथियार के पीछे के आदमी का कल्याण और प्रभावी प्रदर्शन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सैनिक के परिचालन की प्रभावशीलता को सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है जितना उस हथियार की परिचालन प्रभावशीलता का, जिसका वह उपयोग करता है। सैनिकों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के शीर्ष पर होने और बने रहने को सुनिश्चित करने के लिए, उनकी शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सा और पोषण की जरूरत को प्रभावी ढंग से पूरा करने की आवश्यकता है। सैनिकों को पर्यावरण के उन खतरों से भी सुरक्षित किया जाना चाहिए जिनका अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान उन्हें सामना करना होता है। हमारे सशस्त्र बल के कर्मी और उन्हें समर्थन देनेवाले, अपने, अपनी मशीनों और अपने वातावरण के बीच अंतर-संबंधों का एक जटिल अंतर्जाल (वेब) में कार्य करते हैं। इन संबंधों के लिए प्रासंगिक विज्ञानों में जैव-विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी, जैव-इंजीनियरिंग, मौसम और पर्यावरण अध्ययन, पारिस्थितिकी और जैव सुरक्षा, मन-शरीर का मनोवैज्ञानिक अध्ययन, चिकित्सा और अन्य विज्ञान शामिल हैं। इस अंतर्जाल (वेब) के विज्ञानों की एक पूर्ण ज्ञान आधारित समझ के साथ ही, 'मशीन के पीछे के आदमी' को चयनित प्रशिक्षित, सुसज्जित, संरक्षित और युद्ध और शांति-प्रवर्तन के उभरते मंचों पर प्रदर्शन करने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के जीवन विज्ञान अनुसंधान बोर्ड (एलएसआरबी) का लक्ष्य ज्ञान, जानकारी, अनुभव, सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के राष्ट्रीय संसाधनों को मजबूत बनाने और उपयोग करने के लिए देश में जीव विज्ञान के ज्ञान के आधार को बढ़ाना और गहरा करना है। अनुसंधान बोर्ड आपरेशन में सैनिकों के लिए आवश्यक सहायता प्रदान वाले वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के बीच विचारों और अनुभवों के आवश्यक परस्पर निषेचन और मिशन तथा शांति स्टेशनों में उसके उपकरणों के डिजाइन में मानव कारकों को एकीकृत करने के लिए आवश्यक ज्ञान को उत्प्रेरित करने में भी मदद करेगा।

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